*जिसपर था सर्वस्व लुटाया,*

*मेरा वो अरमान कहां है?*

*बोलो नेहरू बोलो गांधी,*

*मेरा हिन्दुस्तान कहां है?*

 

 

*सैंतालीस में भारत बांटा,*

*’उनको’ पाकिस्तान दे दिया;*

*”दो गालों पे थप्पड़ खा लो”*

*मुझे फालतू ज्ञान दे दिया;*

*मुझे बताओ यही ज्ञान तुम,*

*’उनको’ भी तो दे सकते थे;*

*नहीं बंटेगी भारत माता,*

*ये निर्णय तुम ले सकते थे;*

*मगर देश को छिन्न-भिन्न कर,*

*दुनिया भर की सीख दे गए,*

*हिन्दू को दो-फाड़ कर दिया,*

*आरक्षण की भीख दे गए!*

*एक अरब हिन्दू लावारिस,*

*कहो हमारा मान कहां है?*

*बोलो नेहरू बोलो गांधी,*

*मेरा हिन्दुस्तान कहां है?*

 

 

*’सेकुलर’ राष्ट्र बनाना था तो,*

*बिन बंटवारे भी संभव था;*

*छद्म-धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र,*

*बिन भारत हारे भी संभव था;*

*’उन्हें’ पालना ही था तो,*

*क्यों टुकड़े भारत के कर डाले?*

*मुझे बताओ किस की ख़ातिर,*

*डाके अपने ही घर डाले?*

*एक चीन क्या कम दुश्मन था,*

*बाजू पाकिस्तान बिठाया;_*

*कदम-कदम पर इसी पाक से,*

*हम सब ने फिर धोखा खाया;*

*जितनी सस्ती जान हमारी,*

*उतनी सस्ती जान कहां है?*

*बोलो नेहरू बोलो गांधी,*

*मेरा हिन्दुस्तान कहां है?*

 

 

*मुस्लिम की ज़िद पूरी कर दी,*

*हिन्दू का अधिकार भुलाया;*

*भूले सावरकर की पीड़ा,*

*और बोस का प्यार भुलाया;*

*धूल-धूसरित, जग में लज्जित,*

*भारत का सम्मान कर दिया;*

*दो लोगों की पदलोलुपता,*

*पे भारत बलिदान कर दिया !*

*उधम सिंह को पागल बोला,*

*मरने दिया भगत को तुमने;*

*चापलूस के हैं पौ-बारह,*

*दिखला दिया जगत को तुमने;*

*जो जीते उनको हरवाया,*

*’वल्लभ’ का सम्मान कहाँ है?*

*बोलो नेहरू बोलो गांधी,*

*मेरा हिन्दुस्तान कहां है?*

 

 

*टूटा -फूटा जैसा भी था,*

*सैंतालिस में भारत पाया;*

*पर मुझको भी हक़ मिल जाये,*

*ये तुमको हरगिज़ ना भाया;*

*मुल्लों की तनख्वाह बांध दी,*

*मंदिर लूटे तुमने जी भर;*

*सेकुलर की परिभाषा गढ़ दी,*

*उन्हें सब्सिडी हिन्दू पे कर !*

*ना पुराण ना वेद पढ़ाये,*

*जाने क्या बकवास पढ़ाया;*

*शिक्षा में घोटाला कर के,*

*अधकचरा इतिहास पढ़ाया;*

*पूछे गौरव इस भारत में,*

*हिन्दू की पहचान कहां है?*

*बोलो नेहरू बोलो गांधी,*

*मेरा हिन्दुस्तान कहां है?*

आप सभी आपस में भाईचारा बनाए रखें।