श्री विजय ठाकरे जी द्वारा लिखी कुछ कविताएं।

जिंदगी एक जिंदगी है,

जिंदगी को जिंदगी की तरह जियो,

ना कि जिंदगी को अपनी तरह जियो,

क्योंकि जीने का नाम ही जिंदगी है।

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वो चैन से सो रहे हैं शहर बेचकर,
कोई सुहाग बचा रहा जेवर बेचकर,
बाप ने उम्र गुजार दी घरोंदे बनाने में,
बेटा उसकी सांसे खरीद रहा है घर बेचकर,
बर्बाद हो गये कई घर दवा खरीदने में,
कुछ लोगों की तिज़ोरी भर गई जहर बेचकर।