• अ कहीं हम दोनो मिलके, नई दुनिया बसा ले।

देखा था जो सपना हमने, मिल के सज़ा दे।

मेरे खंडों में बसी रहो, मेरी ऊमर भर, मैं आपने दिल से देखता रहूं मेरी ऊमर भर अ दिल हस्तर को मिला के हम सज़ ले

देखा था जो सपना……..

एक चाहत के इस सफ़र में, मिलें हम दोनों

इस प्यार की अंगड़ाई में झुलें हम दोनों

अ कहीं हम अपनी पलकों तुमको बसा ले

देखा था जो सपना………

कहीं दूर फिजाओं से आतीं हैं तेरी खुशबू जो

तुझको अपनी दिल की तन्ममन्ना तेरी खुशबू जो

अ कहीं हस्तर को मिला के हम सज़ा दे देखा था जो

लेखक – विजय ठाकरे